प्रकृति
Saturday, October 19, 2013
काश मेरे पास पंख होते
काश मेरे पास पंख होते
इस डाल से उस डाल
सारा दिन उड़ती रहती
और से सुबह का सीन तो कःी निस न तरती
लेकिन अब क्या करू ऐ सी की हवा उठने वही देती
और मेरी मम्मा मुझे एसे नज़ारो में सोने नही देती
अगले जन्म तो मैने पैदा ही यहाँ होना है
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